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जब प्राण तन से निकले लिरिक्स – Jab Pran Tan Se Nikle Lyrics

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Jab Pran Tan Se Nikle Lyrics
जब प्राण तन से निकले लिरिक्स

Jab Pran Tan Se Nikle Lyrics

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


१. श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का बंसीवट हो,
मेरे सांवरा निकट हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


२. वृंदावन का स्थल हो,
मेरे मुख में तुलसी दल हो,
विष्णु चरण का जल हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


३. सन्मुख सांवरा खड़ा हो,
मुरली का स्वर भरा हो,
तिरछा चरण धरा हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


४. सिर सोहन मुकुट हो,
मुखड़े पर काली लट हो,
यही ध्यान मेरा घट हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


५. केसर तिलक हो आला,
मुख चंद्र सा उजाला,
लालू गले में माला,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


६. कानों जड़ाऊ बाली,
लटकी लेटे हो काली,
देखो खटा निराली,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


७. पितांबर कसी हो,
होठों पर कुछ हंसी हो,
छवि यही मन बसी हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


८. पचरंगी का छानि हो,
पट पित्त से तनी हो,
मेरी बात सब बनी हो,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||


९. पग धो त्रशा मिटाऊ,
तुलसी का पत्र पाव,
सर चरण रज लगाओ ,
जब प्राण तन से निकले ||

इतना तो करना स्वामी,
जब प्राण तन से निकले,
गोविंद नाम लेकर,
फिर प्राण तन से निकले ||

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